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September 27, 2026 हिन्दी
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Online shopping platforms will not charge hidden charges from customers. | ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म कस्टमर्स से नहीं वसूलेंगे हिडन चॉर्जेस: फ्लिपकार्ट-मिंत्रा और जोमेटो-स्विगी जैसे 26 प्लेटफॉर्म डार्क पैटर्न फ्री, देखें लिस्ट


नई दिल्ली28 मिनट पहले

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देश के 26 बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने अपने एप्स और वेबसाइट्स पर डार्क पैटर्न्स का इस्तेमाल बंद करने की घोषणा की है। ये कंपनियां इंटरनल या थर्ड-पार्टी ऑडिट के बाद सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) को सेल्फ-डिक्लेरेशन लेटर सौंप चुकी हैं।

इन कंपनियों में फ्लिपकार्ट, मिंत्रा, जोमेटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। ये कंपनियां ग्रॉसरी, फूड डिलीवरी, फार्मेसी, फैशन और ट्रैवल सेगमेंट की हैं। कंपनियों ने ये डिक्लेरेशन अपनी वेबसाइट्स पर अपलोड भी कर दिए हैं, ताकि कंज्यूमर्स चेक कर सकें।

डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने इसे डिजिटल कंज्यूमर सेफ्टी के लिए बड़ा कदम बताया है, जो बाकी कंपनियों को भी सेल्फ-रेगुलेशन अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

डार्क पैटर्न्स क्या हैं?

डार्क पैटर्न्स वो ट्रिक्स हैं, जो ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान यूजर्स को गुमराह करती हैं। जैसे फेक अर्जेंसी क्रिएट करना, जहां लिखा हो ‘अभी खरीदो वरना स्टॉक खत्म’, या चुपके से कार्ट में एक्स्ट्रा आइटम ऐड कर देना। 2023 में नोटिफाई हुई गाइडलाइंस फॉर प्रिवेंशन एंड रेगुलेशन ऑफ डार्क पैटर्न्स में 13 ऐसे पैटर्न्स को बैन किया गया है।

इनमें फॉल्स अर्जेंसी, बास्केट स्नीकिंग, कन्फर्म शेमिंग, फोर्स्ड एक्शन, सब्सक्रिप्शन ट्रैप, इंटरफेस इंटरफियरेंस, बेट एंड स्विच, ड्रिप प्राइसिंग, डिस्गाइज्ड ऐड्स, नेगिंग, ट्रिक वर्डिंग, SAAS बिलिंग और रोग मैलवेयर शामिल हैं।

ये ट्रिक्स कंज्यूमर्स को अनचाहे प्रोडक्ट्स खरीदने या सब्सक्रिप्शन में फंसाने के लिए इस्तेमाल होती हैं। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत ये गाइडलाइंस 30 नवंबर 2023 को लागू हुईं, ताकि डिजिटल मार्केट में ट्रांसपेरेंसी आए।

किन कंपनियों ने खुद को डार्क पैटर्न फ्री किया?

CCPA को मिले डिक्लेरेशन लेटर्स के मुताबिक, 26 प्लेटफॉर्म्स ने अपनी साइट्स पर जीरो डार्क पैटर्न्स होने की पुष्टि की है।

ये 26 कंपनियां अब डार्क पैटर्न फ्री

1 जेप्टो
2 जोमैटो
3 स्विगी
4 जियोमार्ट
5 बिग बास्केट
6 फार्म ईजी
7 Zepto Marketplace
8 फ्लिपकार्ट इंटरनेट
9 मिंत्रा डिजाइन्स
10 वॉलमार्ट इंडिया
11 मेक माय ट्रिप इंडिया
12 बिग बास्केट इनोवेटिव रिटेल कॉन्सेप्ट्स
13 जियो मार्ट रिलायंस रिटेल
14 ब्लिंकिट
15 पेज इंडस्ट्रीज
16 विलियम पेन
17 क्लियर ट्रिप
18 रिलायंस ज्वेल्स
19 रिलायंस डिजिटल
20 नेटमेड्स
21 टाटा 1mg
22 मीशो
23 इक्सिगो
24 मिलबास्केट
25 हैमलीज इंडिया
26 अजियो / तिरा ब्यूटी / ड्यूरोफ्लेक्स / कुराडेन इंडिया (रिलायंस रिटेल ग्रुप के अन्य प्लेटफॉर्म)

केंद्र सरकार की क्या रही भूमिका?

डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने जून 2025 में एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें ई-कॉमर्स कंपनियों को 3 महीने के अंदर सेल्फ-ऑडिट करने और डिक्लेरेशन सबमिट करने को कहा था।

नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) के जरिए सोशल मीडिया कैंपेन, इंफॉर्मेटिव वीडियोज और वर्कशॉप्स चलाए गए, ताकि कंज्यूमर्स डार्क पैटर्न्स पहचान सकें और शिकायत दर्ज करा सकें।

CCPA ने इसे एक मिसाल बताया है और बाकी डिजिटल प्लेयर्स से भी वैसा ही करने को कहा। अगर कोई कंपनी डेडलाइन मिस करती है, तो रेगुलेटरी एक्शन हो सकता है।

कंज्यूमर्स को कैसे फायदा मिलेगा?

अभी कंपनियों ने अपनी मर्जी से ये वादा किया है कि वो डार्क पैटर्न्स नहीं चलाएंगी, लेकिन आने वाले समय में सरकार इसे सख्ती से लागू भी कर सकती है। इससे कंज्यूमर्स को अब शॉपिंग एप्स इस्तेमाल करते समय कम ट्रिक्स का सामना करना पड़ेगा, जिससे सेफ और ट्रांसपेरेंट एक्सपीरियंस मिलेगा।

डिपार्टमेंट ने कहा कि ये अभियान डिजिटल कंज्यूमर सेफ्टी को मजबूत करेगा। भविष्य में और भी कंपनियां इसमें शामिल होंगी। कंज्यूमर्स को डार्क पैटर्न्स के बारे में एजुकेशनल कैंपेन से ये भी समझाया जाएगा कि डार्क पैटर्न्स होते क्या हैं और इन्हें कैसे पकड़ा जाए।​​​​​​ ये लंबे समय में ये ई-कॉमर्स सेक्टर को ज्यादा भरोसेमंद बनाएगा।

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ई-कॉमर्स पर मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स आसानी से ढूंढ सकेंगे: ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ के लिए अलग से फिल्टर लगेगा, कंज्यूमर मिनिस्ट्री ने नियम ड्राफ्ट किया

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को अब पैकेज्ड सामानों के लिए ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ का फिल्टर अलग से देना होगा। जिससे प्रोडक्ट सर्च कर रहे कस्टमर को उसका ओरिजिन (सामान मूल रूप से किस देश में बना है) का पता आसानी से पता चल सके। डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर ने इसे मेंडेटरी करने के लिए प्रस्ताव लाया है। अगर ये पास हो गया, तो 2026 से लागू हो सकता है।

मंत्रालय ने सोमवार, 10 नवंबर को कहा है कि ये बदलाव 2011 के लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स में संशोधन के जरिए होगा। पैकेज्ड सामानों पर कंट्री ऑफ ओरिजिन लिखने की अनिवार्यता पहले से ही है। नया नियम ई-कॉमर्स पर सर्च के लिए फिल्टर लगाने के लिए लाया जा रहा है। इससे डिजिटल मार्केटप्लेस पर ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और लोकल मैन्युफैक्चरर्स को बराबरी का मौका मिलेगा। पूरी खबर पढ़ें…

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