सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर ईंधन आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है. साथ ही यह कदम प्रदूषण घटाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है.
इथेनॉल में समस्या कहां है?
वर्तमान में जो गाड़ियां बाजार में बिक रही हैं, वे अधिकतर E20 फ्यूल के अनुसार डिज़ाइन की गई हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि पुराने BS3 और BS4 मानक वाले वाहन E20 फ्यूल पर भी ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं. कई मामलों में इंजन कंपोनेंट्स खराब हो रहे हैं, जिससे मरम्मत का खर्च बढ़ रहा है और कई बार वारंटी भी अमान्य हो जाती है.
इथेनॉल से इंजन को कैसे नुकसान होता है?
यदि आपकी गाड़ी जरा पुरानी है और किसी भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन को सपोर्ट नहीं करती तो आपको साधारण पेट्रोल डलवाना चाहिए.
बड़ी कंपनियों की गाड़ियों पर भी असर
आम लोगों की राय भी यही है, वे कहते हैं “सरकार हमसे पेट्रोल के दाम तो पूरे वसूल रही है, लेकिन उसमें मिलावट (इथेनॉल) बढ़ती जा रही है. इससे गाड़ियों की माइलेज कम हो रही है और इंजन भी जल्दी खराब हो रहा है.”
E27 फ्यूल के आने से पहले जरूरी है कि सरकार वाहन निर्माताओं और उपभोक्ताओं को इसके लिए समय, जानकारी और विकल्प दे, ताकि गाड़ियां न केवल इस फ्यूल से चल सकें, बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ भी रहें.